अमेरिका आज से पेरिस जलवायु परिवर्तन समझौते में पुनः शामिल हो रहा : जो बिडेन

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वाशिंगटन : जो बाइडन ने अमेरिका के राष्‍ट्रपति की शपथ लेते ही यह ऐलान कर दिया कि अमेरिका जलवायु परिवर्तन से लड़ने के लिए अंतर्राष्ट्रीय पेरिस जलवायु समझौते में शामिल होने जा रहा है. वास्तव में अमेरिका में राष्ट्रपति पद संभालने के बाद उम्मीद की जा रही थी कि वे डोनाल्‍ड ट्रंप द्वारा लिए गए कुछ चौंकाने वाले फैसलों को वापस लेंगे.

पेरिस जलवायु समझौते पर उन्होंने तुरंत फैसला लिया है. राष्ट्रपति बाइडन ने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका फिर से पेरिस जलवायु समझौते में वापसी की योजना बना रहा है. भारत समेत दुनिया के कई देश पेरिस जलवायु समझौते में शामिल हैं.

अमेरिका पहले पेरिस जलवायु समझौते का सदस्‍य था, लेकिन पिछले साल राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने इससे बाहर निकलने की घोषणा कर दी थी. पेरिस जलवायु समझौते पर साल 2015 में हस्‍ताक्षर किए गए थे. अमेरिका का राष्ट्रपति बनते ही जो बाइडेन ने बुधवार को पेरिस जलवायु समझौते में अमेरिका को फिर से शामिल करने के लिए एक आदेश पर हस्ताक्षर कर दिए हैं.

पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के जलवायु परिवर्तन सुरक्षा को कमजोर करने वाले कामकाज की समीक्षा करने के लिए एक आदेश भी तत्‍काल प्रभाव से शामिल किया जाने वाला है. बाइडन का कहना है कि हम एक तरह से जलवायु परिवर्तन का मुकाबला करने जा रहे हैं, जो हमने अब तक नहीं किया है.

फ्रांस की राजधानी पेरिस में 12 दिसंबर 2015 को 196 देशों के प्रतिनिधियों ने जलवायु समझौते के मसौदे पर सहमति जताते हुए इसे अपनाया था. एक साल बाद 3 नवम्बर 2016 को अमेरिका ने राष्ट्रपति बराक ओबामा के प्रशासन के दौरान पेरिस समझौते को स्वीकार किया था.
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन की ओर से अगस्त 2017 में औपचारिक रूप से इस समझौते से बाहर होने की बात कही गई थी. भारत ने अप्रैल 2016 में औपचारिक रूप से पेरिस जलवायु समझौते पर हस्ताक्षर किये थे. पेरिस जलवायु समझौते के तहत भारत ने वादा किया था कि वह साल 2030 तक अपने कार्बन उत्सर्जन में 33 से 35 फीसदी की कमी लाएगा.